Friday, November 7, 2014

मेरे दिल में तू ऐसे कहीं उतर सी गयी है....

मेरे दिल में तू ऐसे कहीं उतर सी गयी है‚
♪ उतर कर सांसों में थम सी गयी है ♪

कि आइने में देखता हूँ खुद को‚
पर सूरत मेरी कहीं खो सी गयी है

♫ सीरत तो मेरी है ♫
पर सूरत तुम्हारी हो गयी है

सपने देखता तो हूँ दिन में भी‚
पर नींद मेरी कहीं खो सी गयी है

♪ सपने तो मेरे हैं पर ♪
उनमे भी झलक तुम्हारी ही हो गयी है

दिल–ओ–दिमाग तो मेरा है‚
पर उनमें सोंच भी तो तेरी ही हो गयी है

♫ मैं तो जैसे दुनिया की भीड़ में कहीं खो सा गया हूँ ♫
पर मुझमें तू पूरी तरह से समा गयी है

मेरी जिन्दगी का तो कुछ पता ही नहीं‚
पर मेरी दुनिया तो तुझमें ही सिमट सी गयी है।।



तुम्हारी ये आँखें....

कुछ जादू सा करती हैं…… तुम्हारी ये आँखें
बहुत कुछ बोलती हैं…… ये आँखें,,,

तुम कहती हो कुछ खास नहीं हैं..... ये आँखें,
और मैं कहता हूँ दुनिया में सबसे खास हैं..... ये आँखें,

दिल के सारे हाल बयां कर देती हैं..... ये आँखें,
सपनों में आकर नींद को भी चुरा लेती हैं..... ये आँखे,
धड़कनों को भी तेज कर देती हैं..... ये आँखें,

दिल पर चलता नहीं जादू चेहरों और खूबसूरती का,
दिल को तो दीवाना बना देती हैं..... ये आँखें।

आप हमसे बात नहीं करते तो ना करें,
लेकिन हाल सारा आपके दिल का सुना देती हैं..... ये आँखें।

गम सदा रहता है इन्सान के साथ‚
पर उस गम को आँसू बनाकर छलका देती हैं..... ये आँखें।
ना जाने कितने सुन्दर सपने भी दिल में बसा देती हैं..... ये आँखें‚

माना कि नींद आती है आँखों के ही रास्ते‚
मगर कभी कभार नींद भी उड़ा देती हैं...... ये आँखें।

दिल के सारे दर्द छुपा लेती हैं.... ये आँखें‚
अब इससे ज्यादा क्या बोलूँ ????
मेरी सिमटी दुनिया हैं....... ये आँखें।।




एक ख्वाब...

कल रात कली एक ख्वाब में आयी....
धीरे से मेरी नींद उड़ायी....
चुपके से दिल की बात कही‚‚‚‚
कह गयी वो दिल के राज कई।।
वो बातें जो कब से दिल में थीं‚‚‚‚
जो इससे पहले उसने किसी से कहीं नहीं।।
कह गयी क्यों रखा है छुपा के???
अपने दिल को इतना तड़पा के।। ।।

मैं सुनता रहा,,,
पर,,, कुछ कह न सका
वो बातें जो उसने मुझसे कहीं,
मेरी यादें जिसका कोई राज़ ना था....
आज बचा न था उससे राज कोई।।
हर बीते और गुजरे पल का एहसास हुआ...
दुःख मुझको इतना आज हुआ।। ।।

रोता रहा जब आँख खुली,,,
किये हैं गुनाह मैंने जो कई।।
कहने की तो हिम्मत मुझमें है नहीं,,,
कहता हूँ तुमसे मैं आज यही.....
कर देना माफ मुझे तुम,,,,
दिये हैं दर्द जो तुमको मैंने कई।। ।।



चेहरा मेरा... पर झलक उस की...

चेहरा मेरा... पर झलक उस की...
आँखे मेरी... पर निग़ाहें उस की...
दिल मेरा... पर धड़कन उस की...
दिमाग मेरा... पर सोंच उस की...
शरीर मेरा... पर जान उस की...
जीवन मेरा... पर साँसे उस की...

- दीपराज सेंगर  



  चुप चुप अब रहता हूँ, तो फिर बोलना सिखा दे। मैं हँसता नहीं अब, तो फिर मुस्कुराना सिखा दे । सिखा दे हर वो चीज जो मैं भूल गया हूँ। ...