मुझसे बिछड़ के ख़ुश रहते हो???
मेरी तरह तुम भी झूठे हो...
इक टहनी पर चाँद टिका था,
मैं ये समझा तुम बैठे हो...
उजले- उजले फूल खिले थे,
बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो...
मुझ को शाम बता देती है,
तुम कैसे कपड़े पहने हो...
तुम तन्हा दुनिया से लड़ोगे???
बच्चों सी बातें करते हो...
- बशीर बद्र
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